आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां हर छोटी-बड़ी बीमारी के लिए हम दवाइयों पर निर्भर हो गए हैं वहीं प्रकृति ने हमें ऐसे कई चमत्कारी पौधे दिए हैं जिनमें इलाज की जबरदस्त ताकत छिपी है। इन्हीं में से एक है- पत्थरचट्टा का पौधा (Patharchatta Plant)। आपको जानकर हैरानी होगी कि दिखने में साधारण-सा यह पौधा कई औषधीय गुणों से भरपूर है।

पत्थरचट्टा के कई लाभ हैं, जिनमें पथरी को तोड़ना, सूजन और दर्द को कम करना, घावों को भरना और त्वचा की समस्याओं का इलाज करना शामिल है। इसके अलावा, यह रक्तचाप को नियंत्रित करने, संक्रमण से लड़ने, पाचन में सुधार करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में भी सहायक है। इसे अपने औषधीय गुणों, विशेषकर गुर्दे और पित्ताशय की पथरी के इलाज के लिए जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे ‘पाषाणभेद’ के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है पत्थर को तोड़ना। आइए पत्थरचट्टा के पत्ते खाने के प्रमुख लाभों के बारे में जानें।
वैज्ञानिक नाम: ब्रायोफिलम पिन्नाटम,
अंग्रेजी नाम: कलानचो पिन्नाटा,
सामान्य नाम: एयर प्लांट, गुड लक लीफ, मिरेकल लीफ,
हिंदी नाम: पथरचट्टम, पथरचूर, पान-फुट्टी
पत्थरचट्टा के प्रमुख लाभ (Benefits of Stone Breaker)
गुर्दे और पित्ताशय की पथरी (Kidney and Gall Bladder Stones)

यह पथरी के लिए एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार माना जाता है। इसके पत्तों का रस पथरी को घोलने और मूत्र मार्ग से बाहर निकालने में मदद करता है।इसकी पत्तियों का रस सुबह खाली पेट पीने से यूरिन के रास्ते किडनी स्टोन धीरे-धीरे बाहर निकलने लगता है।
मूत्र मार्ग में संक्रमण के लिए (For Urinary Tract Infections)
यह मूत्र संबंधी संक्रमणों और अन्य समस्याओं में भी फायदेमंद है। इन पत्तों का सेवन करके, आप अपने मूत्र तंत्र को बार-बार होने वाले संक्रमणों से बचा सकते हैं। इनका मूत्रवर्धक गुण मूत्र के नियमित प्रवाह को भी सुनिश्चित करता है, जिससे आपका मूत्र तंत्र स्वस्थ और स्वच्छ रहता है।
सूजन और दर्द कम करता है (Reduces Swelling and Pain)

पत्थरचट्टा में प्राकृतिक दर्द निवारक (pain reliever) और सूजन-रोधी (anti-inflammatory) गुण होते हैं, जो शरीर में सूजन और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं।खासकर कि हड्डियों से जुड़ी समस्याएं जैसे कि गठिया और जोड़ों के दर्द में पथरचट्टा का सेवन फायदेमंद है।
त्वचा की समस्याएं के लिए (For Skin Problems)
इसके पत्तों को पीसकर लगाने से एक्ने, पिंपल्स, घाव और अन्य त्वचा संक्रमणों से राहत मिल सकती है। जलने, कटने या घाव होने पर इसकी पत्ती को हल्का गर्म करके प्रभावित हिस्से पर लगाने से दर्द और जलन में राहत मिलती है।
रक्तचाप नियंत्रण के लिए (For Blood Pressure Control)

वहीं पत्थरचट्टे के पौधे में मौजूद गुण हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करने में भी काफी प्रभावी होते हैं। ऐसे में जिस व्यक्ति को हाई BP की समस्या हो उनके लिए पत्थरचट्टा किसी वरदान से कम नहीं होता है।
पाचन में सुधार करता है (Improves Digestion)
पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता: यह पाचन में सुधार करता है, शरीर को डिटॉक्स करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को मजबूत बनाने में मदद करता है।
ब्रीथिंग प्रॉब्लम्स को करे कम (Reduce Breathing Problems)

नियमित रूप से पत्थरचट्टा का काढ़ा पीने से अस्थमा, खांसी और बलगम जैसी समस्याओं से राहत मिल सकता है। यह कफ को पतला करता है और गले की सूजन को भी शांत करने में प्रभावी होता है।
सेवन का तरीका (Method of Consumption)
- रस: 2-3 पत्थरचट्टा के पत्तों को धोकर उनका रस निकाल लें और इसका सेवन करें।
- काढ़ा: पत्तों को पानी में उबालकर काढ़ा भी बनाया जा सकता है।
- कच्चा सेवन: सबसे सरल तरीका है कि सुबह खाली पेट दो से तीन पत्तियां कच्चा चबाकर खाएं।
- लेप: पत्तों को पीसकर माथे पर या घावों पर लगाया जा सकता है।
कितने दिन तक करें पत्थरचट्टे का सेवन (For How Many days Should one Consume Stone Breaker?)
आमतौर पर इस पत्ते का सेवन 21 दिन तक कर सकते हैं। इससे बीमारी जड़ से खत्म करने में मदद मिलती है। पत्थरचट्टा के सेवन के एक घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं।
पत्थरचट्टा के दुष्प्रभाव (Side Effects of Stone Breaker)
पत्थरचट्टा को आम तौर पर सुरक्षित माना जाता है। पर इसके निम्नलिखित दुष्प्रभाव देखे गए हैं :
- इससे थकान हो सकती है।
- इससे गला सूख सकता है।
- इससे पाचन में कठिनाई हो सकती है।
सावधानी: किसी भी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए पत्थरचट्टा का उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक या डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है, खासकर यदि आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं, या कोई अन्य दवा ले रही हैं।
पढ़ने के लिए धन्यवाद !
रीना जैन


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