मुलेठी के फायदे और नुकसान ( Licorice (Mulethi) Benefits and Side Effects in Hindi)

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मुलेठी क्या है? (What is Licorice in Hindi?)

मुलेठी को इंग्लिश में लिकोरिस (Licorice) कहते हैं। औशधिय गुणों से भरपूर मुलेठी एक झाड़ीनुमा पौधा होता है मुलेठी एक जड़ी-बूटी (Herb) है, जो सूखी लकड़ी जैसी होती है। असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। यह सूखने पर अम्ल जैसे स्वाद की हो जाती है। यह स्‍वाद में शक्‍कर से भी मीठी होती है। जड़ को उखाड़ने के बाद दो वर्ष तक उसमें औषधीय गुण बना रहता है। यह ठंडी प्रकृति की होती है और पित्त का नाश करती है। इस पौधे की जो जड़े होती। भूमिगत तना ही ओषधिय गुणों से भरपूर होता हैं। ताजा मुलेठी में पचास प्रतिशत जल होता है, जो सुखाने पर मात्र दस प्रतिशत ही शेष रह जाता है। ग्लिसराइजिक एसिड के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से दस गुना अधिक मीठा होता है। इसमें मौजूद पोषक तत्वों की बात करें, तो एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड, प्रोटीन, वसा आदि अधिक मात्रा में होते हैं। भारत में इसे पान में डालकर प्रयोग किया जाता है। आजकल कई टूथपेस्ट में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

मुलेठी के फायदे (Mulethi Benefits)

गले की समस्या के लिए (For Throat Problem)

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बढ़े हुए कफ से गला, नाक, छाती में जलन हो जाने जैसी अनुभूति होती है, तब मुलेठी को शहद में मिलाकर चटाने से बहुत फायदा होता है. मुलेठी को मुंह में लेकर चूसते रहने से गला बैठने की समस्या में आराम मिलता है। 

त्वचा रोगों के लिए (For Skin Diseases)

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त्वचा रोगों में भी मुलेठी लाभकारी है। चेहरे के मुंहासों को दूर करने के लिए मुलेठी का लेप बनाकर इस्तेमाल किया जाता है। इससे त्वचा का रंग निखर आता है, त्वचा की जलन और सूजन दूर होती है । इसे घिसकर लगाने पर चेहरे के दाग और मुंहासे ठीक हो जाते हैं, साथ ही यह आपकी त्वचा को जवा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुलेठी रक्त को भी शुद्ध करती है जिससे त्वचा की समस्याएं नहीं होती।

मुंह में छाले के लिए (For Mouth Ulcers)

मुंह में छाले हो जाने की स्थिति में मुलेठी चूसना, इसके पानी से कुल्ला करना और उसे पीना बहुत जल्दी छालों से राहत देता है। साथ ही मुलेठी आवाज को मधुर और सुरीली बनाने के लिए भी उपयोग की जाती है।

हिचकी के लिए (For Hiccup)

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हिचकी होने पर मुलेठी के चूर्ण को शहद में मिलाकर नाक में टपकाने तथा पांच ग्राम चूर्ण को पानी के साथ खिला देने से लाभ होता है। मुलेठी चूसने से भी थोड़ी ही देर में हिचकी आना बंद हो जाता है। 

पेशाब में होने वाली जलन के लिए (For Burning Urine)

अगर  पेशाब करते समय जलन हो रही है तो एक चम्मच मुलेठी चूर्ण को एक कप दूध के साथ सेवन करें। इससे पेशाब में होने वाली जलन कम हो जाती है। 

आँखों के लिए (For Eyes)

आँखों में जलन या आँखों से जुड़ा हुआ कोई भी रोग होने पर मुलेठी का इस्तेमाल करने में फायदा होता है। इसके लिए मुलेठी के काढ़े से आँखों को धोएं। इसके अलावा मुलेठी चूर्ण या मुलेठी पाउडर में बराबर मात्रा में सौंफ का चूर्ण मिलाए । इस चूर्ण को सुबह शाम खाने से आँखों की जलन कम होती है और आँखों की रोशनी बढ़ती है। 

पेट के घाव के लिए (For Stomach Ulcers)

What Is a Stomach Ulcer? Gastroenterologists Explain Peptic Ulcers |  Health.com

वैज्ञानिकों ने अनेक प्रयोगों द्वारा इस बात को सिद्ध कर दिया है कि मुलेठी की जड़ का चूर्ण पेट के घावों पर लाभकारी प्रभाव डालता है और घाव जल्दी भरने लगता है। 

सर्दी खांसी के लिए (For Cough & Cold)

सर्दी के मौसम में गले में खराश या खांसी की समस्या अक्सर होती है। ऐसे में मुलेठी के छोटे-छोटे टुकड़े करके चुसते रहने से खांसी की समस्या में राहत मिल सकती है। अगर आपको सूखी खांसी है तो एक चम्मच मुलेठी को शहद के साथ मिलाकर दिन में 2-3 बार चाटकर खाएं। इसी तरह मुलेठी का काढ़ा बनाकर 20-25 मिली मात्रा का सुबह और शाम को सेवन करने से मुलेठी का पूरा फायदा मिलता है।  

बालों के लिए (For Hairs)

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 मुलेठी का उपयोग बालों को सही पोषण देने और बढ़ाने में किया जाता है। मुलेठी से बालों को धोने से बाल तेजी से बढ़ते हैं। मुलेठी और तिल को भैंस के दूध में पीसकर सिर पर लेप लगाने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है। इससे आप बालों को झड़ने और सफ़ेद होने से रोक सकते है। नियमित रूप से इस तेल की 1-2 बूँद नाक में डालने से असमय बाल सफ़ेद नहीं होते और बालों का झड़ना कम हो जाता है। 

मुलेठी का उपयोग (How to Use Licorice in Hindi)

मुलेठी का उपयोग इस प्रकार किया जा सकता है।

  • मुलेठी के पाउडर को पानी के साथ घोलकर सेवन किया जा सकता है। शिशुओं के लिए मुलहठी के जड़ को पत्थर पर पानी के साथ घिसकर शहद या दूध में मिलाकर दिया जा सकता है
  • मुलेठी के टुकड़ों को रातभर पानी में भिगोकर रखें और सुबह इसे ओखली में कूटकर इसका रस निकालकर सेवन करें।
  • खाने के बाद मुलेठी पाउडर और सौंफ के पाउडर को पानी में घोलकर पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • मुलेठी पाउडर को नींबू रस के साथ पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • मुलेठी के पाउडर को दूध में डालकर पी सकते हैं।

मुलेठी को कितना करें इस्तेमाल ( Amount Of Licorice To Be Used)

 इसके बहुत छोटे से टुकड़े को ही खाने के लिए इस्तेमाल करें। खुराक प्रति दिन 10 ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। आपको लगातार 4 सप्ताह अधिक मुलेठी का उपयोग नहीं करना चाहिए। फिर भी इसके सेवन की सही मात्रा की जानकारी के लिए एक बार आहार विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

मुलेठी के नुकसान ( Licorice Side Effects in Hindi)

हद से ज्यादा या गलत तरीके से सेवन करने पर मुलेठी के कई दुष्प्रभाव ( Side Effects of Licorice ) हो जाते हैं ।

  • सीमित मात्रा से ज़्यादा मुलेठी खाने से शरीर में पोटेशियम की कमी, हाई ब्लड प्रेशर और मांसपेशियां कमज़ोर हो सकती हैं।
  • किडनी, डायबीटिक और गर्भवती महिलाएं डॉक्टरी सलाह से ही इसे लें।
  • जो लोग मूत्रवर्धक पर हैं या हाइपोथायरायडिज़्म से पीड़ित हैं, उन्हें मुलेठी का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • इसका उपयोग उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह, एस्ट्रोजेन-संवेदनशील विकार, गुर्दा, हृदय या यकृत और मासिक धर्म संबंधी समस्याओं जैसी मेडिकल कंडीशन वाले लोगों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए।
  • मुलेठी का ज़रूरत से ज़्यादा उपयोग भी मांसपेशियों, क्रोनिक थकान, सिरदर्द, सूजन, एडिमा, सांस की तकलीफ, जोड़ों में अकड़न और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन स्तर को कम और कमज़ोर कर सकती है। 
  • यदि आप मुलेठी (Licorice) का सेवन हर दिन करने लगेंगे, वह भी बिना इसकी सही मात्रा जाने, तो इसका नकारात्मक असर आपको कुछ ही दिनों में दिखने लगेगा। इसके सेवन के दौरान कोई भी विपरीत लक्षण दिखने या महसूस होने पर इसका सेवन रोक दें और डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही फिर से इसका सेवन शुरू करें।

नोट  कोशिश करें कि मुलेठी का पाउडर घर पर ही बना लें, क्योंकि बाजार में पाउडर के रूप में बिक रही मुलेठी में मिलावट भी हो सकती है, जिसका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। 

पढ़ने के लिए धन्यवाद! 

इस ब्लॉग की जानकारी ज्ञान के उद्देश्य से है और इसमें कोई चिकित्सकीय सिफारिश शामिल नहीं है। सलाह का पालन करने से पहले एक प्रमाणित चिकित्सक से परामर्श करें।

                                                                                                                                                                              रीना जैन


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