सहजन (Drumstick)

सहजन को अंग्रेजी में ड्रमस्टिक कहा जाता है। इसका वनस्पति नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। इसमें पाये जाने वाले पोषक तत्वों एवं औषधीय गुणों के बारे में कम ही लोग जानते होंगे।सहजन एक ऐसा महत्वपूर्ण पेड़ है जो बेजोड़ पोषक तत्वों से भरपूर है। इसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम और प्रोटीन पाया जाता है। इसमें दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन होता है। प्राकृतिक रूप से इसमें मौजूद मैंग्नीशियम, शरीर में कैल्शियम को आसानी से पचाने में मदद करता है। इसमें पाया जाने वाला जिंक, खून की कमी पूरी करने में सहायक है। सहजन में अधिक मात्रा में कैल्शियम होने के कारण यह हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में सहायक है। इसमें पाया जाने वाला विटामिन सी, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।सहजन के पत्ते, फूल, फलियां, बीज व छाल सभी का किसी न किसी रूप में प्रयोग होता है।

सहजन के पत्ते, फूल, फलियां, बीज व छाल सभी का किसी न किसी रूप में प्रयोग होता है। सहजन के बीज से तेल निकाला जाता है और छाल पत्ती, गोंद, जड़ आदि से दवाएं तैयार की जाती हैं। सहजन के पत्ते एवं फलियां शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ शरीर में उपस्थित एवं विषैले तत्वों को निकालने का काम करते हैं। सहजन में पोषक तत्वों जैसे- प्रोटीन, ऑयरन, बीटा कैरोटीन, अमीनो एसिड, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटीमिन ए, सी और बी काम्प्लेक्स अधिकता होने के कारण इसे कपोषण को रोकने एवं इसके इलाज में प्रयोग किया जाता है। सहजन पोषक तत्वों एवं स्वास्थ्यवर्धक गुणों के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी मजबूती प्रदान करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

सहजन की फली उपयोग

  • सहजन फली का रस सुबह शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।  सहजन का सूप पीने से शरीर का रक्त साफ होता है। 
  • सहजन के बीजों का तेल शिशुओं की मालिश के लिए प्रयोग किया जाता है। 
  • सहजन की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों का दर्द, वायु संचार, वात रोगों में लाभ होता है।
  • सहजन की फली में मिलने वाले बीज में एक खास तेल होता है। 
  • यह तेल बालों लम्बे, घने करता है और बालों को मजबूत बनाता है। 
  • सहजन के बीज का प्रयोग शरीर एवं चेहरे को पोषण देने के लिए फेशियल मास्क और बॉडी मास्क के रूप में भी किया जाता है।
  • सहजन के बीजों का पेस्ट त्वचा के रंग और टोन को साफ रखने में मदद करता है। मृत त्वचा के पुनर्जीवन के लिए इससे बेहतर कोई रसायन नहीं है। 

सहजन की पत्ते उपयोग

  • इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, शियाटिका ,पक्षाघात,वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है।
  • सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है। 
  • सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है।
  • सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है।
  • सहजन की पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है। 
  • सहजन में शुगर के स्तर को बैलेंस रखने की क्षमता होती है। यह डाइबिटीज से लड़ने में मदद करता है।
  • सहजन की पत्तियों में मौजूद बीटा कैरोटीन एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य कर हृदय को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है ।
  • सहजन की पत्ती को सुखाकर उसकी चटनी बनाने से उसमें आयरन, फास्फोरस, कैल्शियम प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। गर्भवती महिलाएँ और बुजुर्ग भी इस चटनी, अचार का प्रयोग  कर सकते हैं और कई बीमारियों जैसे रक्त अल्पता तथा आँख की बीमारियों से मुक्ति पा सकते हैं।
  • सहजन के पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे तो सर दर्द दूर हो जाता है। 

सहजन की जड़  उपयोग

  •  सहजन की जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।
  • सहजन की जड़ का काढे को सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।
  • फाइबर से भरपूर सहजन शरीर में फैट अवशोषण कम करता है। इन्सुलिन रेजिस्टेंस कम करके यह अनावश्यक फैट जमने को रोकता है। 
  • एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर होने के कारण ड्रमस्टिक की जड़ों का उपयोग बहुत सी बीमारियों को दूर करने में किया जाता है। सहजन अस्थमा, पाचन की बीमारी,गैस, त्वचा की समस्याएं, थायराइड और सूजन को दूर करने में बहुत उपयोगी होता है।

सहजन की छाल उपयोग

  • सहजन की जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है। 
  • सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात व कफ रोग शांत हो जाते है। 
  • सहजन की छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है। 
  • सहजन के पेड़ की छाल गोखरू, कील और बिवाइयों के इलाज की अक्सीर दवा मानी जाती है।

सहजन के नुकसान –

  • प्रेगनेंट (गर्भवती) महिलाओं को सहजन का सेवन करने से बचना चाहिए। 
  • सहजन की पत्तियों में लैक्जेटिव गुण होता है जिसकी वजह से पेट गड़बड़ हो सकता है और अधिक सेवन करने पर सीने में जलन और डायरिया हो सकता है।
  • लो ब्‍लड प्रेशर के मरीजों को आपको सहजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • डायबिटीज पेशेंट के लिए फायदेमंद है लेकिन ज्यादा सेवन शुगर लेवल को बढ़ा सकता है।

पढ़ने के लिए धन्यवाद ! 

इस ब्लॉग की जानकारी ज्ञान के उद्देश्य से है और इसमें कोई चिकित्सकीय सिफारिश शामिल नहीं है। सलाह का पालन करने से पहले एक प्रमाणित चिकित्सक से परामर्श करें।

                                                                                                                                                                              रीना जैन


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